Sati pratha ka virodh karne wale pahle bhartiya kaun the

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Sati pratha ka virodh karne wale pahle bhartiya kaun the :- आज की इस आर्टिकल के मदद से हम सती प्रथा का विरोध करने वाले पहले भारतीय कौन थे, के बारे में जानने वाले है।

दोस्तों अगर आप हल्का-फुल्का इतिहास को पढ़े होंगे तो आपको उसमें सती प्रथा का नाम अवश्य सुनने को मिला होगा अगर आप सती प्रथा से जुड़ी अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं ।

तो आप मेरे इस लेख को ध्यान से पूरे अंत तक पढ़े तभी आपको मेरा यह लेख अच्छे से समझ में आएगा और आप सती प्रथा के बारे में जान पाएंगे तो चलिए शुरू करते हैं इस लेख को।


Sati pratha ka virodh karne wale pahle bhartiya kaun the

राजा राममोहन राय पहले भारतीय थे जिन्होंने सती प्रथा का विरोध किया था। कुछ इतिहासकारों का ऐसा मानना है कि राजा राममोहन राय ने इस तरह के कुर्तियों और प्रथाओं का विरोध जमकर के किया जिसमें से एक सती प्रथा भी है,

इन्होंने अपने दम पर इस प्रथा को बंद करवा दिया और भारत देश में  महिलाओं के लिए स्वतंत्रता का भाव लाया। इन सभी कामो के वजह से भारत मे पहला सेक्युलर व्यक्ति का टैग भी राजा राममोहन राय को ही मिला था।


सती प्रथा क्या है?

सती प्रथा प्राचीन काल का एक रिवाज था और इसे खासकर विधवा औरत के लिए बनाया गया था। इस प्रथा का नियम कुछ इस प्रकार से था कि अगर किसी महिला की पत्ती का मौत हो जाता था।

तो उसके पति के साथ साथ उस महिला को भी जला दिया जाता था और यह प्रथा या रिवाज केवल महिलाओं के लिए था अगर किसी महिला की मौत हो जाती थी तो पति को बतौर सजा नहीं मिलता था जो सजा केवल नारियों को मिलता था और इस सजा से कोई सारे लोग परेशान थे।

 क्योंकि जो महिला अपने पति के वियोग में अपना जान नहीं देना चाहती थी उसे बतौर ढंडी अपराध दिया जाता था और उसे वहाँ के क्षेत्रीय लोगों द्वारा उसके पति के चिता पर जला दिया जाता था और उसे मौत में जाती थी।

तो दोस्तों कुछ इस प्रकार से ही सती प्रथा था और जो कई वर्षों से चलते आ रहा था और इसे उस जमाने के सभी क्षेत्रीय लोग निभाया भी करते थे मगर यह नारियों को पूरी तरह से पसंद नहीं था ।

और वह इसका विरोध करना चाहती थी मगर कर नहीं पाती थी क्योंकि उन्हें पुरुषों द्वारा बड़ी कुरुर सजा दिया जाता था, सती प्रथा के विरोध करने के लिए।


सती प्रथा कैसे होता था?

सती प्रथा महिलाओं के लिए काफी कुरुर सजा माना जाता था अगर किसी महिला के पति का मौत हो जाता है। तो उस महिला को उसके पति के चीते पर जिंदा जला दिया है। कई बार यह प्रथा महिला के मंजूरी से मनाया जाता था और कई बार महिला के मंजूरी ना होने पर उसे जबरन जला दिया जाता था।

जो महिला अपने पति के साथ चिता पर जिंदा जलती है, उसे सती कहा जाता था और सती का अर्थ होता था एक पवित्र महिला जो अपने पति के वियोग में अपना जान दे देती है। तो दोस्तों कुछ इस प्रकार से ही सती प्रथा होता था ।


सती प्रथा कौन खत्म किया?

राजा राममोहन राय ने सती प्रथा को खत्म किया और लोगों को समझाया कि वह प्रथा हमारे समाज के लिए ठीक नहीं है। इससे हमें काफी कठिनाइयों साहनी पड़ सकती है और यह प्रथा नहीं बल्कि महिलाओं के लिए सजा है इससे उन्हें जिंदा जला दिया जाता है और उन्हें बहुत दर्दनाक मौत साहनी पड़ती है।


राजस्थान की अंतिम सती कौन थी ?

राजस्थान की अंतिम सती  “रूप कंवर” थी , ऐसा माना जाता है कि सती प्रथा की आखिरी पीड़ित यही थी। इतिहासकारों के हिसब से भारत में सती प्रथा की आखिरी घटना लगभग 1980 दसक में हुई थी ।  राजस्थान की रहनेवाली “रूप कंवर” महज 18 साल की लड़की थी और ये सती प्रथा की शिकार हो चुकी थी।


भारत में सती प्रथा का प्रथम साक्ष्य कहाँ से मिला ?

हम आपके जानकारी के लिए बता दे कि सती प्रथा का पहला अभिलेखीय साक्ष्य तकरीबन 510 ई. एरण अभिलेख में मिलता है।


राजा राममोहन राय ने सती प्रथा पर रोक कब लगाई ?

राजा राममोहन राय ने सती प्रथा को बंद करने का निर्णय कब का ले लिए थे और इस पर धीरे धीरे काम करना भी शुरू कर रहे थे लेकिन इस पर पूरी तरह से काम लगभग 1829 में किया गया और सती प्रथा बंद करने की कानून भी 1829 में ही पारित किया गया।


राजा राममोहन राय ने सती प्रथा का विरोध क्यों किया ?

कुछ इतिहासकारों का ऐसा मानना है कि राजा राममोहन राय विदेशी काम के लिए गए हुए थे उसी दिन गांव में रह रहे उनके भाई की मृत्यु हो जाती है और फिर क्षेत्रीय समाज के ठेकेदारों और क्षेत्रीय समाज के लोग सती प्रथा के नाम पर उनके भाई के साथ साथ उनकी भाभी को भी उनके भाई के चीते पर चलाने जा रहे थे।

और इसी के विरोध में राजा राममोहन राय ने सती प्रथा का विरोध किया। राजा राममोहन राय सती प्रथा के पीछे इतने हाथ धो करके पड़ गए थे कि उन्होंने अंग्रेजी शासन और अंग्रेजी जजों को विवश कर दिया इसे रोकने की कानून पारित करने के लिए।


सती प्रथा का अंत कब और किसने किया ?

 राजा राममोहन राय के सती प्रथा का विरोध करने पर गवर्नर जनरल लॉर्ड विलियम बेंटिक ने लगभग 4 दिसंबर, 1829 को सती प्रथा बन्द करने की क़ानून पास किया।


( अंतिम शब्द )

उम्मीद करता हूं, कि आप को मेरा यह लेख बेहद पसंद आया होगा और आप इस लेख के मदद से सती प्रथा का विरोध करने वाले पहले भारतीय कौन थे, के बारे में जानकारी प्राप्त कर चुके होंगे।

हमने इस लेख में सरल से सरल भाषा का उपयोग करके आपको सती प्रथा से जुड़ी जानकारी देने की कोशिश की है और आप सभी पर मेरा संपूर्ण विश्वास है,

 कि आप सभी मेरे इस लेख को ध्यान से पूरे अंत तक पढ़ चुके होंगे और सती प्रथा से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर चुके होंगे, इस लेख को पढ़ने के लिए धन्यवाद…

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