Surdas ka janm kab hua tha | सूरदास के गुरु कौन थे ?

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Surdas ka janm kab hua tha :- आज के इस लेख की मदद से हम सूरदास के गुरु कौन थे, के बारे में जानने वाले हैं।

दोस्तों अगर आप कविताएं और रचनाएं पढ़ते हैं तो आप कवि सूरदास जी के बारे में अवश्य जानते होंगे मगर क्या आपको मालूम है कि कवि सूरदास जी का जन्म कहां हुआ था और कवि सूरदास जी के गुरु कौन थे और कवि सूरदास जी का जीवन परिचय क्या रहा है।

अगर आपका जवाब ना है तो आप हमारे इस लेख के साथ अंत तक बने रहिए क्योंकि इस लेख में हम इसी पर विचार विमर्श करने वाले हैं तो चलिए शुरू करते हैं इस लेख को को बिना देरी किए हुए।


surdas ka janm kab hua tha | सूरदास का जन्म कब हुवा था ?

महान कवि सूरदास जी का जन्म तकरीबन 1478 ईस्वी में हुआ था। माना जाता है कि सूरदास जी का जन्म स्थान आगरा के मथुरा मार्ग पर स्थित रुनकता नामक गांव था। सूरदास जी प्राचीन काल के बहुत जाने-माने और प्रसिद्ध कवि हुआ करते थे उनके द्वारा लिखे गए रचनाएं आज भी स्कूल में बच्चों को पढ़ाया जाता है ।

महान कवि सूरदास जी का जीवन बहुत ही कठिन अवस्था में बिता था क्योंकि यह जन्मसिद्ध अंधे थे और अंधे होने के कारण उनके परिवार वालों ने घर से निकाल दिया था और यह महज 6 से 7 साल के वर्ष में घर छोड़ दिए थे।

कवि सूरदास जी अपने मेहनत के बदौलत अपना नाम किया और परचम लहराया। आप सोच सकते हैं कि इन्होंने कितना मेहनत किया होगा और कठिनता का सामना किया होगा क्योंकि यह जन्म से अंधे होने के साथ-साथ अकेले भी थे।

कवि सूरदास ने अपने अंदर के कला को इस तरह से उजागर किया कि उनका नाम आज भी याद किया जाता है और उनके द्वारा लिखे गए रचनाएं भी पढ़े जाते हैं।


Surdas Ke Guru kaun the | सूरदास के गुरु कौन थे ?

सूरदास जी के गुरु बल्लभाचार्य थे । अगर आप विस्तार से सूरदास जी के गुरु के बारे में जानने की कोशिश करेंगे तो इसके पीछे भी एक रोचक कहानी है। कुछ इतिहासकारों का ऐसा मानना है कि सूरदास जी एक बार भ्रमण पर वृंदावन गए थे वहीं पर उन्हें वल्लभाचार्य मिले जो कि उनसे ज्ञान में कई अधिक बड़े थे और उनके पास बहुत से जानकारी भी थी।

कुछ देर बात करने के बाद दोनों जन को एक दूसरे की बातें काफी पसंद आई और वह दोनों का विचार लगभग एक ही था तभी कवि सूरदास जी ने अपने मुख से एक वाणी का उच्चारण करके एक कविता की पंक्ति गया और वह कविता की पंक्ति बल्लभाचार्य को बहुत पसंद आया।

तब जाकर बल्लभाचार्य ने, कवि सूरदास जी को सिखाने का मन बनाया और उसे अपना शिष्य का स्थान दिया और कवि सूरदास जी ने बड़ी कुशलता के साथ बल्ब आचार्य को अपना गुरु माना और उनके द्वारा पढ़ाए गए पाठ सीखने लगे तो कुछ इस प्रकार से ही सूरदास जी का गुरु बल्लभाचार्य बने।


सूरदास का जीवन परिचय

हमने ऊपर के टॉपिक में जाना कि सूरदास जी का जन्म कब हुआ था और यह भी जाना कि सूरदास जी के गुरु कौन थे अब हम इस टॉपिक में जानेंगे कि आखिर सूरदास जी का जीवन परिचय क्या रहा है तो चलिए शुरू करते हैं इस टॉपिक को बिना देरी किए हुए।

महान कवि सूरदास जी का पूरा नाम संत रविदास था और जन्म तकरीबन 1478 ईस्वी में हुआ था। माना जाता है कि सूरदास जी का जन्म स्थान आगरा के मथुरा मार्ग पर स्थित रुनकता नामक गांव था। सूरदास जी के माता जी का नाम अज्ञात है मतलब अभी अच्छे से दर्शाया नहीं है मगर इनके पिताजी का नाम रामदास है।

सूरदास जी पेशे से एक महान कवि थे और यह जीवन भर अविवाहित रहे थे मतलब उन्होंने शादी नहीं किया था। सूरदास ने श्री वल्लभाचार्य से ज्ञान प्राप्त किया था। श्री वल्लभाचार्य जी ही सूरदास के गुरु थे।

सूरदास जी अपने जीवन में प्रमुख प्रमुख रचनाएं दी है जो आज भी पढ़े जाते हैं सूरदास जी एक बहुत महान कवि थे जिन का गुणगान आज भी किया जाता है।

सूरदास जी का मृत्यु 1580 ईस्वी में हुवा था। इनका जीवन काल लगभग (102 वर्ष) का रहा था, इनका मृत्यु स्थान पारसौली गांव (गोवर्धन पर्वत) था।


सूरदास द्वारा लिखे गए रचनाएं

सूरदास द्वारा लिखे गए रचनाएं कुछ इस प्रकार से है। इनमें सूरसागर, सूरसारावली, साहित्य लहरी,  ब्याहलो के अतिरिक्त दशमस्कंध टीका, नागलीला, नल-दमयन्ती, भागवत्, गोवर्धन लीला, सूरपचीसी, सूरसागर सार, प्राणप्यारी, आदि ग्रंथ सम्मिलित हैं।


FAQ, s

Q1. सूरदास जी कौन थे?

Ans. सूरदास जी भक्ति काल के बहुत महान कवि थे उन्होंने अपने जीवन में बहुत से महत्वपूर्ण महत्वपूर्ण रचनाएं दिए जिनका गुणगान आज भी किया जाता है।

Q2. सूरदास जी के उपास्य देव कौन थे?

Ans. सूरदास जी के उपास्य देव इष्ट भगवान श्रीकृष्ण को मानते थे।

Q3. सूरदास जी का जीवन परिचय कैसे याद करें?

Ans. सूरदास जी का जीवन परिचय याद करने का काफी आसान तरीका है। आपको तो मालूम होगा कि सूरदास जी महान कवि थे और यह भक्ति काल के कवि थे। इसी आधार पर हमने उनका पूरा जीवन परिचय बता रखा है तो आप ऊपर में उन्हें पढ़ करके काफी आसानी से याद कर सकते हैं।

Q4. सूरदास जी की भाषा कौन सी है?

Ans. सूरदास जी की भाषा ब्रजभाषा की और इन्होंने अपनी ज्यादातर रचनाओं ब्रज भाषा में ही रची है

Q5. सूरदास जी को कौन सा पुरस्कार मिला?

Ans. सूरदास जी के जीवन में बहुत सारे पुरस्कार मिले हैं क्योंकि यह इतने अच्छे अच्छे काम ही याद किया करते थे । महान कवि सूरदास जी को महाकवि का उपाधि भी मिला था।\


( अंतिम शब्द )

उम्मीद करता हूं, कि आप को मेरा यह लेख बेहद पसंद आया होगा और आप इस लेख के मदद से सूरदास जी के गुरु कौन थे, के बारे में जानकारी प्राप्त कर चुके होंगे।

हमने इस लेख में सरल से सरल भाषा का उपयोग करके आपको Surdas ka janm kab hua tha, के बारे में बताया है।

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