शिवाजी के गुरु का नाम क्या था | Shivaji Ke Guru Ka Naam Kya Tha

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Shivaji Ke Guru Ka Naam Kya Tha :- दोस्तों जब भी आप हमारे देश भारत का इतिहास पढ़े होंगे तो उसमें मराठों के महाराजा छत्रपति शिवाजी का नाम अवश्य सुनने को मिला होगा मगर क्या आपको मालूम है कि महाराज छत्रपति शिवाजी के गुरु कौन थे और महाराज छत्रपति शिवाजी कौन थे ।

और छत्रपति शिवाजी की मृत्यु कब हुई थी और छत्रपति शिवाजी की जन्म कब हुई थी अगर आपको यह सब नहीं मालूम है तो आप हमारे इस लेख के साथ अंत तक बने रहे क्योंकि इस लेख में हम महाराज छत्रपति शिवाजी से जुड़ी हर एक जानकारी प्राप्त करने वाले हैं तो चलिए शुरू करते हैं इस लेख को बिना देरी किए हुए।


शिवाजी के गुरु का नाम क्या था | Shivaji Ke Guru Ka Naam Kya Tha

समर्थ गुरु रामदास नामक व्यक्ति छत्रपति शिवाजी के गुरु थे। और ऐसा माना जाता है कि शिवाजी के यह आध्यात्मिक गुरु थे, हालांकि उन्होंने छत्रपति शिवाजी को बहुत सारी जानकारी दिए और उनको साहस और पराक्रम के राह पर चलने की राह भी दिखाई। छत्रपति शिवाजी ने अपने जीवन में एक और व्यक्ति को गुरु माना है जिनका नाम दादाजी कोंडदेव है।

 वह भी गुरु रामदास की तरह ही थे। कुछ इतिहासकारों का ऐसा मानना था कि समर्थ गुरु रामदास अपने सभी शिष्यों में से छत्रपति शिवाजी को अधिक स्नेह और प्रेम किया करते थे। और उनका अधिक ध्यान इन्हीं पर रहा करता था और रहा बात छत्रपति शिवाजी महाराज का तो वह भी गुरु के समान रामदास जी को पूजते थे और उनकी आदर करते थे।

छत्रपति शिवाजी महाराज अपने जीवन में बहुत से लोगों को गुरु मानते थे और उनकी पूजा भी किया करते थे। उनके दिलों में संत के लिए काफी स्नेह और प्रेम भावनाए मौजूद थी और वह अपने भावनाओं का आदर भी करते थे और वह हर एक संत, साधु, महात्मा की मदद भी किया करते थे।

हालांकि इतिहास में इस बात को पूरी तरह से पुष्टि नहीं की गई है कि रामदास जी ही छत्रपति शिवाजी के गुरु थे। बस लोग वर्षों से ऐसा मानते आ रहे हैं इसी के आधार पर हम भी आपको बता रहे हैं।


समर्थ रामदास जी कौन थे ?

समर्थ रामदास जी महाराष्ट्र के एक प्रसिद्ध संत थे यह प्राचीन काल में काफी जाने माने व्यक्ति थे। ऐसा माना जाता है कि यह छत्रपति शिवाजी महाराज के गुरु भी थे। आपको मालूम होगा कि संत और गुरुओं की भूमि है महाराष्ट्र और उन्ही संतो में से एक संत हैं रामदास स्वामी। 

समर्थ रामदास जी को राष्ट्र गुरु के नाम से भी जाना जाता है, रामदास जी का पूरा नाम नारायण सूर्यजी पंत कुलकर्णी था। समर्थ गुरु रामदास जी का जन्म 1608 ईस्वी को हुआ था। रामदास जी ने ” दासबोध ” नामक एक ग्रंथ की रचना भी की थी और वह रचना पूरी तरह से मराठी भाषा में लिखी हुई थी क्योंकि संत रामदास जी महाराष्ट्र के रहने वाले थे और उन्हें मराठी पूरे तरह से आती थी।

समर्थ गुरु रामदास जी का जन्म महाराष्ट्र के जालना जिले के जाम्ब नामक स्थान  पर रामनवमी के दिन मध्यान में जमदग्नि गोत्र के देशस्त्र  ऋग्वेदई ब्राम्हण परिवार में हुआ था। अगर हम उनके निजी जीवन के बारे में बात करें तो समर्थ गुरु रामदास जी के पिता का नाम सूर्यपंत था और इनके माता जी का नाम राणु बाई था।

यह बहुत ज्ञानी भी थे क्योंकि यह अपने बल बुद्धि और पराक्रम पे भरोसा करके महाराज छत्रपति शिवाजी को ज्ञान दिए थे और छत्रपति शिवाजी भी इन्हें अपना गुरु मानते थे। उनका जीवनकाल बहुत ही रोचक तरह से बीता हुआ है और यह अपने जीवन में हमेशा आगे ही बढ़ते गए हैं और इनकी मृत्यु वर्ष 1682 को हुवा था।


छत्रपति शिवाजी कौन थे ? 

दोस्तों आज महाराज छत्रपति शिवाजी को कौन नहीं जानता ऐसा शायद ही कोई  व्यक्ति होगा जो छत्रपति शिवाजी को नहीं जानता होगा क्योंकि छत्रपति शिवाजी हिंदू धर्म के बहुत ही बड़े और महान राजाओं में से एक माना गया  है।

आज भी महाराष्ट्र में लोग छत्रपति शिवाजी के महान खीसे को अपने बाल बच्चे को सुनाते हैं, और उनके सौंदर्य को दिखाने की कोशिश करते हैं। इसी से आप जान चुके होंगे कि महाराज छत्रपति शिवाजी कितने बड़े और महान राजा रहे होंगे।

जिस तरह से महाराज छत्रपति शिवाजी ने अपने शासनकाल में अपने शासन को आगे बढ़ाया उसका परिणाम आज उनके पीढ़ी देखते है। कुछ इतिहासकारों का ऐसा मानना था कि अगर छत्रपति शिवाजी की तलवार और जुनून ना बोलती तो यह हिंदुस्तान कब का मुगलिस्तान हो चुका होता।

छत्रपति शिवाजी को गजब किस्म का राजा माना गया है क्योंकि यह कभी भी पीछे हटने वाले राजाओं में से नहीं थे उनके पास एक बेहतरीन रणनीति बनाने का तरीका और दिमाग था और यह एक बेहतरीन सेनानायक भी थे।

इन्होंने अपने कम सेना को लेकर ही हजारों मुगलों को मार गिराया और उनके ऊपर अपने परचम को लहराया। महान राजा छत्रपति शिवाजी का जन्म 19 फरवरी 1630 ईस्वी को हुआ था। महान राजा छत्रपति शिवाजी का पूरा नाम शिवाजी राजे भोसले था।

इनके पिता जी का नाम शाहजी भोंसले था और  माता जी का नाम जीजाबाई था और इनके पत्नी का नाम सईबाई निम्बालकर था।  इनके पिता जी का नाम शाहजी भोंसले था और  माता जी का नाम जीजाबाई था और इनके पत्नी का नाम सईबाई निम्बालकर था। 

छत्रपति शिवाजी ने अपने जीवन काल में बहुत बड़े-बड़े और महान महान काम किया उन सभी कामों को इस आर्टिकल में वर्णन करना और व्याख्या करना बहुत ही मुश्किल है।


FAQ, s

Q1. शिवाजी ने सूरत को कब कब लूटा था?

Ans.महान राजा छत्रपति शिवाजी ने सूरत नामक जगह को लगभग 2 बार लूटा जिस में से पहला बार 1664 में व दूसरी बार अक्टूबर, 1670 में।

Q2. शिवाजी के गुरु का पूरा नाम क्या था ?

Ans. छत्रपति शिवाजी के गुरु का पूरा नाम नारायण सूर्यजी पंत कुलकर्णी था।
Q3. क्या समर्थ गुरु रामदास जी ही शिवाजी के गुरु थे ?
Ans. हम आपको जानकारी के लिए बता दें कि समर्थ गुरु रामदास शिवाजी के गुरु थे हालांकि इसे इतिहास में पूरी तरह से पुष्टि नहीं किया गया है मगर वर्षों से लोग इस इतिहास को मानते हुए आ रहे हैं।
Q4. छत्रपति शिवाजी का जन्म कब हुआ था ?
Ans. महान राजा छत्रपति शिवाजी का जन्म 19 फरवरी 1630 ईस्वी को हुआ था।


( Conclusion, निष्कर्ष )

उम्मीद करता हूं, कि आप को मेरा यह लेख बेहद पसंद आया होगा और आप इस लेख के मदद से शिवाजी के गुरु का नाम क्या था , के बारे में जानकारी प्राप्त कर चुके होंगे।

हमने इस लेख में सरल से सरल भाषा का उपयोग करके आपको किस शिवाजी के गुरु, से जुड़ी हर एक जानकारी के बारे में बताने की कोशिश की है।

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